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Samastipur News: अनीमिया मुक्त बिहार अभियान को लेकर समस्तीपुर में प्रशासन सख्त, जांच से दवा तक व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | समस्तीपुर सदर अस्पताल में अनीमिया मुक्त बिहार अभियान का जिलास्तरीय प्रसारण हुआ। डीएम रोशन कुशवाहा ने जांच, आयरन-फॉलिक एसिड और जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए।

समस्तीपुर, 25 अगस्त। जिले में महिलाओं, गर्भवती माताओं, किशोरियों और बच्चों को अनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मंगलवार को सदर अस्पताल, समस्तीपुर के सभागार में ‘अनीमिया मुक्त बिहार’ विशेष अभियान के राज्यस्तरीय कार्यक्रम का जिलास्तरीय सजीव प्रसारण किया गया। राज्यस्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया, जबकि समस्तीपुर में आयोजित कार्यक्रम की निगरानी जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में अभियान की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्ययोजना पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनीमिया की रोकथाम केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समय पर जांच, पोषण संबंधी जानकारी, उपचार और नियमित फॉलोअप को एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लक्षित समूहों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। खासतौर पर महिलाओं, गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों की स्वास्थ्य जांच को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

अनीमिया के मामलों में शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को एक प्रमुख समस्या माना जाता है। इसके कारण कमजोरी, थकान और कार्यक्षमता में कमी जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के मामले में समय पर पहचान और उपचार को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों पर जांच और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगी।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जांच के दौरान अनीमिया से पीड़ित पाए जाने वाले लोगों को आयरन एवं फॉलिक एसिड की गोलियां तथा आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता की लगातार निगरानी करने की जरूरत भी बताई गई।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अनीमिया के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को संतुलित भोजन, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

अभियान में विभागों के बीच बेहतर समन्वय को भी महत्वपूर्ण माना गया। स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग यानी आईसीडीएस तथा शिक्षा विभाग को मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों और महिलाओं तक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना है।

किशोरियों के बीच अनीमिया की पहचान और रोकथाम को लेकर जागरूकता विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी तरह गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और जरूरत के अनुसार आयरन-फॉलिक एसिड की उपलब्धता पर भी स्वास्थ्य विभाग को विशेष ध्यान देना होगा।

सदर अस्पताल में आयोजित जिलास्तरीय कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्यस्तरीय कार्यक्रम के सजीव प्रसारण के माध्यम से जिले के अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को अभियान की प्राथमिकताओं से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम के बाद डीएम रोशन कुशवाहा ने अधिकारियों से अभियान को कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखने की अपेक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया। उनके निर्देशों के अनुसार जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में जांच, दवा उपलब्धता और जागरूकता गतिविधियों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा।

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि अनीमिया की पहचान समय रहते हो और पीड़ित लोगों को उपचार एवं पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ आईसीडीएस और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय को जमीन पर प्रभावी बनाने की जरूरत होगी।

दरअसल, अनीमिया जैसी समस्या से निपटने में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ परिवार और समुदाय की भूमिका भी अहम होती है। लोगों में सही खान-पान और पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ने से अभियान को लंबे समय तक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

समस्तीपुर प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की व्यवस्था कितनी नियमित होती है, जरूरतमंदों को दवाएं कितनी आसानी से मिलती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान किस स्तर तक पहुंचता है। प्रशासन ने जिले को अनीमिया से मुक्त बनाने के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और अभियान को धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू करने का संकल्प दोहराया है।

अब अभियान की असली परीक्षा जमीन पर

अनीमिया मुक्त बिहार अभियान की सफलता का आकलन केवल कार्यक्रमों और बैठकों की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित जांच हो, चिन्हित मरीजों को समय पर दवाएं मिलें और लोगों में पोषण को लेकर व्यवहारिक बदलाव दिखाई दे।

समस्तीपुर में जिलाधिकारी ने जांच, दवा और जागरूकता—तीनों मोर्चों पर काम करने के निर्देश देकर अभियान की दिशा स्पष्ट कर दी है। अब स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि इन निर्देशों को गांव और वार्ड स्तर तक पहुंचाया जाए।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों पर लगातार निगरानी जरूरी है। सिर्फ आयरन-फॉलिक एसिड की गोलियां उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा; यह भी देखना होगा कि लक्षित लाभार्थियों तक दवा पहुंच रही है या नहीं और उसका नियमित सेवन हो रहा है या नहीं।

यदि स्वास्थ्य, आईसीडीएस और शिक्षा विभाग मिलकर एक साझा रणनीति के साथ काम करें, तो अनीमिया की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत किया जा सकता है। समस्तीपुर में शुरू हुई यह पहल तभी असरदार साबित होगी, जब सरकारी निर्देश स्वास्थ्य केंद्रों से निकलकर हर जरूरतमंद परिवार तक पहुंचेंगे।

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